मै तुम्हे क्या लिखूं,तुम्हारे बिषय में जानता भी तो नहीं.
रिक्तता में खोजता हूँ...शुन्य तक निहारता हूँ कल्पनाओं के रूपों में आकार धुन्धता हूँ..बहुत सोंच कर भे कहा सोंच पता हूँशुन्य से चल कर शुन्य तक पहुँचता हूँमै तुम्हे क्या लिखूं,तुम्हारे बिषय में जानता भी तो नहीं.निशब्द परिभाषाओं का अर्थ लगता हूँखुद को...
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Arshad Ali
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[04 Mar 2010 10:21 AM]



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