किस क़द्र सादा हैं हम
किस क़द्र सादा हैं हम, कैसी क़ज़ाएं माँगेंदुश्मनों से भी मुहब्बत की अदाएं माँगेंहाल यह है कि हुआ पल का गुज़रना भी मुहालकितने ख़ुशफहम हैं, जीने की ...
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A.U.SIDDIQUI
एक शायर
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[23 Feb 2010 06:00 AM]



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