ग़र होश जरा सा अब तक है फ़ाग़ी.. होश तू अपना तौल !
लगा कि ये साल वी सुक्खा-सुखियाँ ही निकल जाने को है, पर वह न हुआ । अपना आज कुछ ऎसा डौल लग गया कि, लगदा है आज सब बेडौल ही लिक्खा जावेगा । ऒऎ कोई नहीं, वो तो जैसे ही सन्दीप ने एक ठोका, यो लाग्या कि अब... -९९९- पूरा आलेख मूल ब्लॉगपृष्ठ पर पढ़ने हेतु शीर्षक पर...
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डा. अमर कुमार
होलीबेतक़ल्लुफ़बुरबकईसँगी साथी
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[08 Mar 2010 06:34 AM]



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