ग़ज़ल

KALAM KA KARAZ दिल को , दस्तक देता रहता ,धुन्दला ,धुन्दला एक फ़साना !ख्वावों में है , एक ही मंज़र ,उसका आना , उसका जाना !हंसता गुल ,समझाए सबको ,सच है , कल मेरा मुरझाना !राह बदल लेता है , अक्सर ,सीधा चला , कब ये ज़माना !फूल खिला तो , लाश मिली ,मुबारक , भंवरे का मर जाना... [पूरी पोस्ट]
writer sanjeev kuralia

ग़ज़ल

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[16 Feb 2010 08:20 AM]

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