मुझे क्षमा करना...
सागर तो हू..मगर सतह मरूस्थल सी हैऔर तासीर उस रेगीस्तान जैसी..जो प्यासा है प्यार के लिए..मै तुम से दूर रह करखुद को भुलाये रहता हू..उमडते सागर कीकल-कल करती लहरो सालोगो की भीड मेंसवयं को उलझाये रहता हू.मगर पाता हू जब भीतुम्हे अपने करीब..भूल जाता हू...
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अनामिका की सदाये......
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[10 Feb 2010 13:42 PM]



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