कटु सत्य
बिछोह की कराहती वेदना सेमै अस्त-व्यस्त सा हू.अतीत के रेश्मीन धागेजल चुके है.जो बाकी हैं..वो वेदना और व्यथा से सने हुये हैं .कर्कशता और कुप्ता काघाव लिए हुये हैं .अब आगे की ओर कूच करना है .जीवन की बंजर भूमी परएक छोटा सा सोता लाना जरुरी है .मगर अभी तो पानी...
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अनामिका की सदाये......
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[17 Feb 2010 12:18 PM]



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