लम्हा-दर-लम्हा मुझे तड्पाते क्यू हो,
लम्हा-दर-लम्हा मुझे तड्पाते क्यू हो,हर पळ मुझे याद तुम आते क्यू हो ..!लो मैने रख तो दिया तुम्हारा हाथ अपने सीने परतिनका तिनका अब मुझे और जलाते क्यू हो ??मुहोब्बत की है हमने, तो ये अधूरी सी क्यू है ,जुदाई की सजा है हर पळ, मिलन को दूरी क्यू है !जला के खुद...
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अनामिका की सदाये......
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[24 Feb 2010 07:49 AM]



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