मै हू ओस..

अनामिका...... छोड दे रात भर आज तू मुझे रोने क लिए..समेटा करुंगा शब- ए- रात गम, तेरी ख़ुशी के लिएतेरी रजा यही है तो यही ही सहीमै पळ पळ मरता रहूंगा, तेरी चाहत के लिएनसीबो के खेळ छिपे हैं अपनी अपनी लकीरो मेंतू सो चैन की नींद, मै हू ओस, शब पर बहने के लिएमजबूरियो के नाम... [पूरी पोस्ट]
writer अनामिका की सदाये......
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[04 Mar 2010 07:41 AM]

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