'उत्पादकता' से 'प्रकृति' महत्वपूर्ण, ये बात गांठ बांध लो सभी !!
डायरी के एक पन्ने में मुझे यह कविता दिखाई पडी। पढने पर मुझे याद आया कि पर्यावरण दिवस पर आयोजित किसी कार्यक्रम में बोलने के लिए बेटे को कविता लिखना सिखलाते हुए मैने यह तुकबंदी की थी । यह पन्ना इधर उधर खो न जाए , इस ख्याल से इस यादगार कविता को यहां...
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संगीता पुरी
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[22 Feb 2010 14:34 PM]



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