ब्लोगिंग पर “नई दुनिया” में आलोक मेहता का छपा व्यंग्य
नई दुनिया में ब्लोग पर कपड़ा फाड होली पर प्रकाशित आलोक मेहता का व्यंग बहुत महत्वपूर्ण है। वैसे यह ‘‘बुरा न मानो होली है ’’के तहत छपा है। यह कुछ हद तक कड़वा सच बताता है, कुछ इसमें होली का रंग भी है।यह हिन्दी ब्लागिंग पर एक तरह का कटाक्ष है।यह हमें अपना...
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jayantijain
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[05 Mar 2010 10:01 AM]



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