प्यार- मोहब्बत वगैरह,वगैरह
''वेलेंटाइन डे'' का नाम सुनते ही इसके विरोधियों के मन में मन में अशलीलता और प्रेमी-प्रेमिका की असहज छवि मन में उभरती है| प्रेम में अश्लीलता कब, कैसे और कहाँ से आ गई, इस पर कभी कोई नहीं सोचता है| प्रेम जीवन की शाश्वत्ता है, हर युग में इसे स्थान और सम्मान...
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जेन्नी शबनम
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[14 Feb 2010 01:14 AM]



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