अब के बरस

लखनऊ ब्लॉगर एसोसिएशन होली को तो हर वर्ष आना ही थासो इस बरस भी आगई|अबीर,,गुलाल ,पिचकारी तो मिलते हैं बाजार में पर नहीं मिला करती मन की उमंगें |मौसम तो फागुनीहो ही होजाता है पर नहीं होते स्पंदित मन की वीणा के तार|होली मन की खुशियों का त्यौहार हैइससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह... [पूरी पोस्ट]
writer beena
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[26 Feb 2010 22:52 PM]

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