लो क सं घ र्ष !: बुरा मनो या भला क्या कर लोगे होली है : खूने जिगर भी बहाओ तो जानूँ
रंगो की होली तो सब खेलते हैं।खून जिगर भी बहाओं तो जानूँ।। प्रेम के रंग में मन भी रंग जाए बन्धू। कोई ऐसी होली मनाओं तो जानूँ।।दो बदन मिलना केाई जरूरी नहीं।दिल से दिल को मिलाओं तो जानूँ।। ठुमरी वो फगुआ तो गाते सभी हैं। प्रेम का गीत कोई सुनाओ तो...
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Suman
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[28 Feb 2010 07:32 AM]



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