गरीबी मिटाई जा सकती है लेकिन मिडिया को उसका प्रचार बेहतर ढंग से करना होगा
आजादी के तरेसठ साल बाद भी ७० करोड़ लोग बीस रूपए से कम प़र गुजारा कर रहे है . दूसरी तरफ केवल एक फिल्म को चलाने के लिए १ दिन के लाखो रूपए खर्च किये जा रहे है . और मीडिया भी दिन - भर शिव सेना - राज ठाकरे मसाला लोगो की कवरेज में लगा रहता है . मीडिया को...
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vikas mehta
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[12 Feb 2010 05:08 AM]



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