. अगर कुछ पैसा देश की गरीबी कम करने में लगाया जाये तो देश में रोज - रोज के लड़ाई झगड़े लुट - पाट न हो .
शादियों का मोसम है डीजे की धुन प़र लोग थिरक रहे है नाच रहे है . अछे बड़े - बड़े रिसोर्ट्स , धर्मशालाओं की बुकिंग चल रही है . लाखो रुपया शादियों प़र खर्च हो रहा है कार्डो प़र , गाडियों प़र , साज - सज्जा प़र , और खाने प़र लोग जीवन को फूल एन्जॉय कर रहे...
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vikas mehta
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[16 Feb 2010 05:44 AM]



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