ग़ालिब : रोज़ा कैसे रखें ?
एक बार की बात है कि जब रमज़ान गुज़र गया और मिर्ज़ा ग़ालिब किले में गये तो बादशाह ने पूँछा "मिर्ज़ा ! तुमने कितने रोज़े रखे ?" मिर्ज़ा ग़ालिब ने अर्ज़ किया, "पीरो मुर्शिद ! एक नहीं रखा !" फिर एक कि़ता पढ़ा :इफ़्तारे-सूम की कुछ अगर दस्तगाह हो ।इस शख़्स को ज़रूर है...
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अनिल कान्त :
mirza ghalib
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[23 Feb 2010 23:37 PM]



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