मेरा पक्का ख्याल है यदि ये चुगलखोरी बंद नहीं हुयी तो ...!
शाशिभूषणतामड़े उवाच;दोस्तों.आज के तेजरफ्तार दौर में इन्शान की जरूरते काफी बढ़ी-चढ़ी रहती है , सर चढ़ कर बोलती जरूरते उसे अपने सुभीते के लिए रोज एक नयी ईजाद के लिए उकसाती रहती है / इसी चक्करबाजी में शायद टेलीफून का औतार हुआ होगा / टेलीफून एक...
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S B Tamare
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[11 Feb 2010 10:53 AM]



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