शहर की लड़की
शहर की लड़की के लिए कविता नहीं होतीकहकहे होते हैंजिसे वो अपने लोगों के साथ तब बांटती हैजब शहर से दूर खड़ा कोई ,शहर में आ जाता हैउसके घर की खिड़कियाँ अक्सर बंद होती हैंकम रोशनी में उसे अपना चेहराज्यादा खुबसूरत लगता हैऔर वो बच जाती है ,अनचाहे चेहरों को देखने...
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आवेश
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[25 Feb 2010 08:42 AM]



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