हम ही हैं वो लोग- साहिर लुधियानवी को समर्पित सत्या शिवरमन की कविता
हम ही हैं वो लोगहम ही है वो लोग जिनका हमें था इन्तज़ार हम ही है वो ख़्वाब जो हमने देखा था।वो सुबह जो कभी आई नहीं उसका क्या ग़महमारे हाथों से जो बरसती हैं रोशनीहमारे कदमों की तेजी से उठा है उजालाहमारी ही मेहनत से जलते हैं चिरागऔर ये सब किसी सूरज से कम तो...
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[03 Mar 2010 01:21 AM]



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