Ismat Zaidi "Shefa kajgaonvi
"कहाँ खो गईं नन्ही किलकारियां "-___________________________________________________________________(ये ग़ज़ल २६/११ से मुतास्सिर हो कर कही गयी थी ,लेकिन आज फिर पुणे ब्लास्ट ने हमारे ज़ख्मों को ताज़ा कर दिया ) ग़ज़ल------------सरासीमगी सी समंदर...
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इस्मत ज़ैदी
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[21 Feb 2010 14:34 PM]



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