क्रांति के सिपाही की जेब में प्रेम कविता
मेरे सब की धुरी हो तुममैं दूसरों की शिक़ायतें तुम्हीं से करना चाहता हूँदूसरों से मिले आशीर्वाद भी तुम्हें ही दे देना चाहता हूँतुम मुझे सबसे सुंदर इसलिए भी लगती होक्योंकि मेरे भीतर की सारी सुंदरता तुम्हारे लिए हैतुम्हें चूमने तुम्हारे गले लगने की मेरी...
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शशिभूषण
मेरी कविताई
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[13 Feb 2010 08:33 AM]



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