आलोचना

हमारी आवाज़ एक आदमी ने रोटी पकाई.खाते-पीते मित्र को खाने पर बुलाया.ज़िद करके खाना खिलाया.वह अघाया मित्र दिन भर खाते रहने का आदी हो चला था.इसलिए इंकार न कर सका.अनमना खाता रहा.जिज्ञासु मेज़बान से रहा न गया तो उसने मेजबानी में आत्मीयता जोड़ते हुए पूछ लिया-.क्या रोटी... [पूरी पोस्ट]
writer शशिभूषण

छोटी कहानियाँ

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[05 Mar 2010 08:06 AM]

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