चरैवेति - चरैवेति ( निरंतर चलना )

गीत............... मैं जलधिमरुस्थल का खारेपन के साथ मुझमे रेत भी शामिल है उड़ चलूँ मैं आँधियों के साथ ये फन मुझे हासिल है .मुट्ठी में बंद कर बांधने की करो कोशिश तो रेत की तरह ही मुट्ठी से फिसल जाती हूँ अतृप्त सी हैं इच्छाएं और है गरल कंठ में तृप्त होने के भाव का स्वांग सा... [पूरी पोस्ट]
writer sangeeta swarup
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[16 Feb 2010 12:35 PM]

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