मर्ज हुआ ऐसा हुआ
ऐसी उठापटक है, ऐसा कौवा - कांव.नौका में जल भर गया पानी में है नाव..जर्जर नौका पर चले महगाई की धार.बीच भंवर में काम क्या आएगी पतवार..आपस में चलती रही फूट फूट औ फूट.डाकू- चोर मिले रहे लूट लूट औ लूट ..बिन बरसे बादल गए, गए महीनों- साल.देश तरक्की कर गया अभी...
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अरविन्द चतुर्वेद
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[25 Feb 2010 11:43 AM]



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