बानगी है यह !
देश आजाद हुआ १९४७ में और भारतीय गणतंत्र प्रतिष्ठित हुआ २६ जनवरी १९५० को. लेकिन तभी से सत्तारूढ़ दल की छत्रछाया में भ्रष्टाचार और तस्करी का मर्ज भी पैदा हो चुका था. इसलिए यह नहीं मानना चाहिए कि यह कोई हाल-फिलहाल की बीमारी है. बानगी के तौर पर १९५३ में लिखी...
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अरविन्द चतुर्वेद
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[04 Mar 2010 12:18 PM]



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