बौराए हैं आम

जनपद अरविन्द चतुर्वेद रह रह छाया कांपती सदा हवा के संग.आँखों से उड़ जात है मौसम का हर रंग..पेड़ तप रहे धूप में रह रह उठती आह.पगडण्डी की पीठ पर बंजारे की राह..हरियाली के नाम पर मन में उठती हूक.परती धरती क्या कहे हुआ कलेजा टूक..गुस्से में सूरज तपे हुई कौन-सी... [पूरी पोस्ट]
writer अरविन्द चतुर्वेद
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[07 Mar 2010 10:56 AM]

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