स्टेचू….

मेरे विचार, मेरी कवितायें याद है, तुमने जब मुझे भरी रोड पर ’स्टेचू’ बोला था, वो लम्हा फ़्रीज़ हो गया था, सिर्फ़ तुम्हारे एक ’पास’ के इन्तजार मे..... आज जब ज़िन्दगी भागती है, हर एक लम्हे पर पाव रखकर.... मै मजबूर लम्हो के बीच, खडा सोचता हू, कि तुम आओ और ’स्टेचू’ बोल दो.... और इस बार... [पूरी पोस्ट]
writer Pankaj Upadhyay

ज़िन्दगी

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[01 Mar 2010 13:34 PM]

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