स्वप्न!!

मेरे विचार, मेरी कवितायें तुम्हे क्या कहूं ख़ुद ही बताओ, अपने नैनो की भाषा हमें भी समझाओ, शायर की ग़ज़ल कहूं या कहूं 'पंकज' की कविता, आंखों को तेरी कमल कहूं या सूर्योदय मैं सविता । झील सी इन आंखों को हल्के हल्के, उठाने के बाद जैसे ही देखती हो, हल्का सा मुस्कुराकर , जब कुछ कहती हो... [पूरी पोस्ट]
writer Pankaj Upadhyay

ज़िन्दगी

views
3
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[21 Feb 2010 02:22 AM]