पिछ्ले पन्नो से कुछ - रेत पे नाम!!
सुना है यादें संजोकर रखी जाती हैं इस गतिमान पर स्थिर ह्रदय में..... मेरी भी कुछ यादें उससे जुड़ी हुई हैं। न जाने हम कब तक समंदर के किनारे बैठे रहते थे, हर एक लहर को अपने पास आते और थोड़ा सा भिगोकर जाते हम साथ बैठे देखा करते। वो रेत पे मेरा नाम लिखती और...
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Pankaj Upadhyay
ज़िन्दगी
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[22 Feb 2010 21:01 PM]



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