आतंक के साए

रचना रवीन्द्र आतंक के साए क्या रंग देखो क्या रंगों का त्यौहार हर तरफ फैला है अन्धकार अब न वो रंग, न फागुन की ठिठोली हर तरफ है तो बस लाल रंग की होली क्यों वो माँ गाए, क्यों वो बहन गुनगुनाये क्यों पत्नी माथे पे, अबीर सजायेजब रंग गया हो, सदा के लिएलहू की होली में अपना ही... [पूरी पोस्ट]
writer रचना दीक्षित

कविता

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[28 Feb 2010 06:57 AM]

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