बिखरे सितारे:7 मझधार में
.(पूर्व भाग :उस रात नींद में न जाने वो कितनी बार डरके रोते हुए उठी...लेकिन मासूम का प्यार देखो...सुबह अपने पितापे दृष्टी पड़तेही खिल उठी..पूजा की आँखों से चुपचाप नीर बहा..हर गुज़रता दिन न जाने कितनी चुनौतियाँ भरा होता!सास अक्सर मिलने...
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kshama
maa
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[17 Feb 2010 00:40 AM]



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