निकानोर पार्रा की कविता: एक अजनबी के लिए खत

नई बात जब गुजर जाएंगे साल,साल जब गुजर जाएंगे औरहवा बना चुकी होगी एक दरारमेरे और तुम्हारे दिलों के बीच;जब गुजर जाएंगे साल और रह जाउंगा मैंसिर्फ एक आदमी जिसने मोहब्बत की,एक नाचीज जो एक पल के लिएतुम्हारे होटों का कैदी रहा,बागों में चलकर थक चुका एक बेचारा इंसान... [पूरी पोस्ट]
writer चन्दन

अनुवाद

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[11 Feb 2010 11:28 AM]

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