“चलना” को संज्ञा होना चाहिये था
किसी नितांत निचाट सड़क परतुम्हारे साथहोता हूं जब भीमैं सोचता हूंकि चलनायदि क्रिया नहीं होतीहोती कोई वस्तुकाँच या मिट्टी से बनीतोड़कर रख लेताएक टुकड़ा उसकाअपने झोले मेंऔर जब भी होता अकेलापन(यद्यपि मेरे साथतुम्हारी गैर मौजूदगी मेंमौजूदगी का हीदूसरा नाम है...
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चन्दन
कविता
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[13 Feb 2010 03:18 AM]



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