पता: श्रीकांत की कविता

नई बात आम बात है पड़ोसी राहगीर से कहीं का पता पूछ लेना और उतना ही कठिन है उसे आसानी से जान लेना तथा पहुँच पाना वहां तक. लोग जो बता सकते हैं कोई पता और जो लोग नहीं बता सकते उसे उनके चेहरे पता पूछने से पहले से बता रहे होते हैं की वह उस जगह का पता जानते अथवा नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer चन्दन

कविता

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[18 Feb 2010 09:12 AM]

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