भेड़िया, मैं

नई बात (यह कविता सूरज की है)मिशालों की जरूरत,किस्सों की खुराकऔर अपनेअपराधों को श्लील दर्ज करने केलिये सभ्यता ने तुक्के पर हीभेड़िये को बतौर खलपात्र चुनाइंसान की रुहानी भूख के लियेघृणित किस्सों का किरदार बनाभेड़िया, जान ना पाया अपनाअपराध, जबकि यह बताने मेंनही है... [पूरी पोस्ट]
writer चन्दन

कविता

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[21 Feb 2010 10:48 AM]

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