देवता बीमार है: कुमार विनोद की मशहूर गज़ल
आस्था का जिस्म घायल रूह तक बेजार हैक्या करे कोई दुआ जब देवता बीमार हैतीरगी अब भी मजे में है यहाँ पर दोस्तोंइस शहर में जुगनुओं की रौशनी दरकार हैभूख से बेहाल बच्चों को सुनाकर चुटकुलेंजो हँसा दे, आज का सबसे बड़ा फनकार हैमैं मिटा के ही रहूँगा मुफ़लिसी के दौर...
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चन्दन
कुमार विनोद
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[26 Feb 2010 06:02 AM]



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