बिना गणित के देखिए : उड़न तश्तरी

हिंदी का शृंगार आज मैंने डॉ. रूपचंद्र शास्त्री मयंक के ब्लॉग "मयंक" पर प्रकाशित पोस्ट  "दोहा लिखिएः वार्तालाप" पर उड़न तश्तरी की एक टिप्पणी पढ़ी --  शब्दों को मैं गिन सकूँ, यह मुझको नहिं आय ।बिना गणित के देखिए, दोहा लिख नहिं पाय... [पूरी पोस्ट]
writer रावेंद्रकुमार रवि

गणित

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[21 Feb 2010 02:22 AM]

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