चौपाल : आंच पर देसिल बयना
आँच-5 -- हरीश प्रकाश गुप्त रचनाकार के अन्दर धधकती संवेदना को पाठक के पास और पाठक की अनुभूति की गरमी को रचनाकार के पास पहुँचाना आँच का उद्धेश्य है। सृजन का मूल संवेदना है। इसी संवेदना से बीज ग्रहण कर रचनाकार अपने सृजन में जीवन का सत्य और यथार्थ मात्र ही...
[पूरी पोस्ट]
करण समस्तीपुरी
आंच
3
0
0
0
0
[25 Feb 2010 08:00 AM]



Shuffle







