पूर्वजों की रीत हूँ मैं....
होली की शुभ-कामनाएं और ईद-मिलाद-उल-नवी का मुबारकबाद ! कल सायं से ही मुझे अपनी एक कविता की अन्त्य-पंक्तियाँ "भूल बैठे सब जिसे वह पूर्वजों की रीत हूँ मैं....." याद आ रही है। कविता मैं इस ब्लॉग पर प्रकाशित कर चुका हूँ।क्रूर काल का ग्रास हूँ !किन्तु अमित...
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करण समस्तीपुरी
संस्मरण
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[01 Mar 2010 12:52 PM]



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