दुबारा कब आओगे...

मेरा कुछ सामान... हवा का एक तेज झोंका,आया था मुझसे मिलने,कमरे की खिड़की आधी खोल गया...कुछ खास था इस झोंके में,हर झोंका नहीं आता मुझ तक,खिड़की खोलकर, कुछ कहने...हर झोंका लेकर नहीं आता,एक खास खुशबू साथ अपने,काँच पर खिड़की के मेरे,लिखकर नहीं जाता हर झोंका...कुछ खास तो था ये... [पूरी पोस्ट]
writer अम्बरीश अम्बुज

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[07 Mar 2010 15:14 PM]

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