मदन महोत्सव पर भी कुछ लिखो-पढो बंधुओं

चेतना के स्वर उजाले की ओर अक्सर प्रश्न उठता है कि प्रेम क्या है। आज तक प्रेम की कोई सर्वसम्मतपरिभाषा नहीं निकल पाई। इतना जरूर है कि प्रेम को ढाई अक्षरों का नाम देकर किताबों में समेट कर रखा नहीं जा सकता।जब सोणी ने महिवाल का हाथ थामा होगा अथवा हीर ने रांझे को चाहा होगा, तब कबीर... [पूरी पोस्ट]
writer चेतना के स्वर

चेतना

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[14 Feb 2010 09:50 AM]

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