क्या पुलिस वाले इंसान नही कीड़े-मकौड़े है?“चर्चा हिन्दी चिट्ठों की” (ललित शर्मा)
आज मिडिया पर से भी लोगों का भरोसा उठता जा रहा है, इतने चैनल हैं कि कुछ भी उल-जलुल दिखाते रहते हैं। कुछ तो अंधविस्वास को अविश्नीय तरीके से बढावा दे रहे हैं। ताबीज बेचना रुद्राक्ष बेचना टोना-टोटका बताना तो आम हो गया है। समाचार को इतना सनसनीखेज बना देते हैं...
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ललित शर्मा
चर्चा हिंन्दी चिट्ठों की
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[19 Feb 2010 18:47 PM]



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