शब्दो के दरमियाँ फासले बहुत थे - A Random Thoughts
शब्दो के दरमियाँ फासले बहुत थे ,पर कुछ बातें तो निकली जुबान से !अनसुनी न थी बातें मेरी ,मगर गुस्ताख़ी का नाम दे गये !यूँ तो फिदरत ही नही समझाने की,कहते कहते बस एक अंजाम दे गए !रचना : सुजीत कुमार लक्की...
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sujit kumar lucky
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[07 Mar 2010 02:48 AM]



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