भाव सुमन
आनन्द ही आनन्द समाया हैसतगुरु तुम्हारे चरणों मेंअनमोल वचन अब पाया हैसतगुरु तुम्हारी वाणी मेंआनन्द ही आनन्द .......................मैं कैसे भुला दूँ नेह तेरातुमने ही मुझे अपनाया हैदुनिया ने मुझे ठुकराया हैसतगुरु ने ज्ञान जगाया हैआनन्द ही आनन्द...
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[11 Feb 2010 00:11 AM]



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