श्याम संग खेलें होली
कान्हा ओ कान्हाकहाँ छुपा है श्याम सांवरियाढूँढ रही है राधा बावरियाहोली की धूम मची हैतुझको राधा खोज रही हैअबीर गुलाल लिए खडी हैतेरे लिए ही जोगन बनी हैमाँ के आँचल में छुपा हुआ हैरंगों से क्यूँ डरा हुआ हैएक बार आ जा रे कन्हाईतुझे दिखाएं अपनी रंगनायीसखियाँ...
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वन्दना
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[27 Feb 2010 01:48 AM]



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