गज़ब कहर बरपा है महुए के मद का भाई........ जोगीरा सर र र र र र र हो..... जोगी जी (ललित शर्मा)

शिल्पकार के मुख से फ़ागुन का मौसम है बस अब मन के रंग-अबीर-गुलाल उड़ रहे हैं, दिलों पर भी मस्ती छाई और हम भी मस्ती मे हैं,  होली आने को जो है, अब उड़े रे रंग गुलाल। अभी से माहौल बन रहा हैं। प्रकृति ने भी अपने समस्त रंगो को धरा पर बिखेर दिया है। सभी झूमे जा रहे हैं, हम... [पूरी पोस्ट]
writer ललित शर्मा

शिल्पकार

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[19 Feb 2010 21:43 PM]

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