हो्ली आई रे! होली आई रे! आईए होली का स्वागत करें!!!

शिल्पकार के मुख से हमारे ३६ गढ़ में होली का माहौल परम्परागत रूप से बसंत पंचमी से ही प्रारंभ हो जाता है. होलीका दहन स्थल पर पूजा करके अंडा(एरंड) का पेड गड़ाया जाता है प्रति दिन उसके बाद शाम होते ही नवजवानों की टोली नंगाड़ों के साथ फाग गीत गाते है जिसकी लय और तन इतनी उत्तेजक... [पूरी पोस्ट]
writer ललित शर्मा

चिटठा जगत. ब्लाग वाणी

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[21 Feb 2010 07:18 AM]

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