फागुन में जरा सा तुम महक जाओ !! (ललित शर्मा)

शिल्पकार के मुख से फागुनी मौसम हो गया है....प्रकृति ने अपनी मनोरम छटा बिखेर दी है....... कल शाम को खेतों की तरफ गया था तो देखा कि वातावरण में भीनी-भीनी खुशबु है जो मद मस्त कर दे रही है....... डूबते हुए सूरज की छटा निराली है. ऐसे उनका याद आ जाना गजब ढा गया........कभी इन... [पूरी पोस्ट]
writer ललित शर्मा

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[23 Feb 2010 20:30 PM]

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