मृदंगनुमा भवन
मृदंगनुमा भवन मृदंगनुमा भवन जो, ढोलक जैसा होय।बरतन बाजे ढोल से, ढोली ऐसा रोय ।।ढोली ऐसा रोय, ढोलण परेशां होवे ।डॅाक्टर आवे रोज, श्मशान अचानक जोवे ।।कह ‘वाणी’ कविराज, बदलो यह जीवन ढ़ंग।नई पत्नी आवे, तुम त्यागो यह मृदंग।। शब्दार्थ: ढोली = भवन का मालिक, ढोलण...
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भूमि
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[25 Feb 2010 10:25 AM]



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