है ! चारभुजा
है ! चारभुजा चार भुजा असमान हो, शून्य होयगा मान। धन भी छोड़े आपको, अंत होय अपमान।। अंत होय अपमान, मन सदैव अशांत रहे। दौड़-दौड़ के जाय, जंगल के एकांत में।। कह ‘वाणी’ कविराज, ढूंढ़े सब अनुज अनुजा । जोड़े लंबे हाथ, मदद कर हे ! चारभुजा।। शब्दार्थ: चार भुजा=प्लाट...
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[01 Mar 2010 10:26 AM]



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